26 वर्षों से राखी की डोर में बंधा अनमोल रिश्ता, डॉ. बी.के. अग्रवाल और मुंहबोली बहन ने पेश की मानवता की मिसाल

26 वर्षों से निभा रहे हैं रक्षाबंधन का अनमोल रिश्ता

26 वर्षों से राखी की डोर में बंधा अनमोल रिश्ता, डॉ. बी.के. अग्रवाल और मुंहबोली बहन ने पेश की मानवता की मिसाल


न धर्म की दीवार, न मजहब की सीमा—26 साल से कायम है भाई-बहन का अटूट रिश्ता

आगरा : रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। आगरा के वरिष्ठ फिजिशियन एवं एमडी मेडिसिन डॉ. बी.के. अग्रवाल और मुस्लिम समाज से ताल्लुक रखने वाली उनकी मुंहबोली बहन का रिश्ता पिछले 26 वर्षों से इसी अटूट विश्वास और स्नेह की डोर में बंधा हुआ है।

यह रिश्ता केवल एक डॉक्टर और मरीज के बीच का संबंध नहीं, बल्कि धर्म, जाति और मजहब की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता, भाईचारे और आपसी विश्वास की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है।

हर वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर उनकी मुंहबोली बहन डॉ. बी.के. अग्रवाल को राखी बांधने आती हैं। 26 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही इस परंपरा ने समय के साथ दोनों के बीच एक मजबूत पारिवारिक और आत्मीय रिश्ता कायम कर दिया है।

डॉ. बी.के. अग्रवाल ने कहा कि, “रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि दिल से बनते हैं। मेरी बहन हर वर्ष मुझे राखी बांधती हैं और यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य और गर्व की बात है।”

वहीं उनकी मुंहबोली बहन ने कहा कि डॉ. अग्रवाल ने हमेशा एक सगे भाई की तरह उनका साथ निभाया है। बीमारी के समय हो या पारिवारिक जिम्मेदारियां, उन्होंने हर अवसर पर भाई के रूप में सहयोग और स्नेह दिया है।

रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर दोनों का यह अनमोल रिश्ता समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि प्रेम, विश्वास और अपनापन किसी धर्म या मजहब की सीमाओं में नहीं बंधता। सच्चे रिश्ते इंसानियत और दिलों के जुड़ाव से बनते हैं।

डॉ. बी.के. अग्रवाल और उनकी मुंहबोली बहन का 26 वर्षों पुराना यह रिश्ता आज के समाज के लिए भाईचारे, सौहार्द और मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल है।